Wednesday, May 4, 2011

क्यों दूर हो कर भी कोई

क्यों दूर हो कर भी
कोई दिल के पास रहता है .

दिल के पास हो कर भी
क्यों उस का इंतज़ार रहता है .

यह कैसा दर्द है
जो मीठा सा लगता है .

महफ़िल में हूँ मगर
मुझे तनहा सा लगता है .

क्यों हम हर पल
उनके ख्यालों में खोये रहते हैं .

उनके ही ख्यालों से
अपनी दुनिया सजाये रहते हैं .

क्यों लगता है
हम उनके बिना अधूरे हैं .

मिल जाए अगर वोह
तो सारे सपने पूरे हैं ..

27 comments:

निशांत said...

क्यों दूर हो कर भी
कोई दिल के पास रहता है

bahut acchi bhav ke saath likhi gayi shayari..
aapka aabhar..

sushma 'आहुति' said...

bhut hi sunder kavita hai...

Patali-The-Village said...

दिल की बहुत गहराई से लिखी कविता | धन्यवाद|

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

अपने ख्यालों को सुंदर शब्द दिए आपने...... बहुत बढ़िया

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

श्रीमान जी, क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी कल ही लगाये है. इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.

Vijai Mathur said...

अच्छे भावों को अभिव्यक्त किया है.

RameshGhildiyal"Dhad" said...

ye pyaar ka dard hai jo meeta-meetha lagta hai...
aap bahut achchha likh rahi hai...lagaataar likhie bada hi achchha hame milega parhne-sunne ko...badhaiyaan.....

Babli said...

बहुत ख़ूबसूरत कविता प्रस्तुत किया है आपने! हैपी मदर्स डे!

Hema Nimbekar said...

as usual....wonderful lines....u always make me dreamy.....keep it up..

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

प्रेम के विह्वल भावों की व्याकुल रचना ....अति सुन्दर

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

प्रिय दोस्तों! क्षमा करें.कुछ निजी कारणों से आपकी पोस्ट/सारी पोस्टों का पढने का फ़िलहाल समय नहीं हैं,क्योंकि 20 मई से मेरी तपस्या शुरू हो रही है.तब कुछ समय मिला तो आपकी पोस्ट जरुर पढूंगा.फ़िलहाल आपके पास समय हो तो नीचे भेजे लिंकों को पढ़कर मेरी विचारधारा समझने की कोशिश करें.
दोस्तों,क्या सबसे बकवास पोस्ट पर टिप्पणी करोंगे. मत करना,वरना......... भारत देश के किसी थाने में आपके खिलाफ फर्जी देशद्रोह या किसी अन्य धारा के तहत केस दर्ज हो जायेगा. क्या कहा आपको डर नहीं लगता? फिर दिखाओ सब अपनी-अपनी हिम्मत का नमूना और यह रहा उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से
श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी लगाये है.इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है.मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.
क्या ब्लॉगर मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं अगर मुझे थोडा-सा साथ(धर्म और जाति से ऊपर उठकर"इंसानियत" के फर्ज के चलते ब्लॉगर भाइयों का ही)और तकनीकी जानकारी मिल जाए तो मैं इन भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के साथ ही अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हूँ.
अगर आप चाहे तो मेरे इस संकल्प को पूरा करने में अपना सहयोग कर सकते हैं. आप द्वारा दी दो आँखों से दो व्यक्तियों को रोशनी मिलती हैं. क्या आप किन्ही दो व्यक्तियों को रोशनी देना चाहेंगे? नेत्रदान आप करें और दूसरों को भी प्रेरित करें क्या है आपकी नेत्रदान पर विचारधारा?
यह टी.आर.पी जो संस्थाएं तय करती हैं, वे उन्हीं व्यावसायिक घरानों के दिमाग की उपज हैं. जो प्रत्यक्ष तौर पर मनुष्य का शोषण करती हैं. इस लिहाज से टी.वी. चैनल भी परोक्ष रूप से जनता के शोषण के हथियार हैं, वैसे ही जैसे ज्यादातर बड़े अखबार. ये प्रसार माध्यम हैं जो विकृत होकर कंपनियों और रसूखवाले लोगों की गतिविधियों को समाचार बनाकर परोस रहे हैं.? कोशिश करें-तब ब्लाग भी "मीडिया" बन सकता है क्या है आपकी विचारधारा?

hot girl said...

bahut sundar.

Arvind Mishra said...

ओह ....कितनी कशिश भरी है इस रचना में :)

prerna argal said...

जिसकी में आशीक वो तो बेवफा निकला ,
बिछड़े हम ऐसे की ,
गिरते हुए आँसों की आवाज़ भी सुनाई न दी bahut hi sunder lafjon main likhi behatrin najm.badhaai aapko.

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

उसकी आहात भी सुनाई न दी .........

ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है... कहीं ये वो तो नहीं :)

veerubhai said...

शायद ये प्यार है ,हाँ हां ये प्यार है ।
न कोई वक्त न कोई उम्मीद न कोई वायदा ,
रहगुज़र पर खड़े थे करना था तेरा इंतज़ार ।
इंतज़ार का अपना ज़याका है ,
सुन्दर रचना है .

veerubhai said...

क्यों लगता है यह, हम उनके बिना अधूरे हैं ,
मिल जाए अगर वह, तो सारे सपने पूरें हैं .
रहते ख़्वाब अधूरे हैं ,बिन तेरे हम "घूरे" हैं .
मेरे सपने तेरे हैं ,बिन फेरे हम तेरे हैं ।
तेरे हैं न मेरे हैं ,जनम जनम के फेरे हैं .
एक शैर आपकी नजर मनप्रीत जी -
पलकें भी चमक उठतीं हैं सोने में हमारी ,
आँखों को अभी ख़्वाब छिपाने नहीं आते .

Rakesh Kumar said...

मनप्रीत जी ,मन की प्रीत को आपने भावपूर्ण व मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है.आपकी प्रस्तुति मन को छूती है.

मेरे ब्लॉग पर आपके आने का बहुत बहुत आभार.

BrijmohanShrivastava said...

इंतजार शीर्षक से आपकी रचना पढी। इसके अलावा 'जी चाहता है' और 'क्यों दूर होकर भी ' कविताऐं पढी । वर्तमान रचना का तो शीर्षक ही इन्तजार है क्यों दूर होकर में " इन्तजार रहता है" तीनो रचनायें श्रेष्ठ । अब एक निवेदन
उठे-
उठकर चले -
चल कर रुके -
रुक कर कहा होगा-
हमीं क्यों जायें बहुत है उनकी हालत देखने वाले

pragya said...

"क्यों दूर हो कर भी
कोई दिल के पास रहता है
दिल के पास हो कर भी
क्यों उस का इंतज़ार रहता है"
बहुत ख़ूबसूरत...ये ऐसा सवाल है जिसका जवाब शायद आज तक किसी को नहीं मिला...

NEELANSH said...

क्यों लगता है
हम उनके बिना अधूरे हैं .

मिल जाए अगर वोह
तो सारे सपने पूरे हैं ..

bahut sunder....

Richa P Madhwani said...

बहुत ख़ूबसूरत कविता :)
अति सुन्दर....व्याकुल रचना

Ravikar said...

ati-sundar,
likhte raho

Hema Nimbekar said...

wah wah...bahut khoob...

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι said...

दिल के पास होकर भी,
क्यूं उसका इन्तज़ार रहता है।

बेहतरीन अभिव्यक्ति, बधाई।

उन्मुक्त said...

मुझे तो लगता है कि जब कोई दूर रहता है तब ही दिल के पास रहता है। पास आने पर मालुम नहीं क्यों दूर चला जाता है।

मनप्रीत जी मैं आपके इस चिट्ठे पर आता हूं पर यहां इतनी टिप्पणियां होती हैं कि लगता है कि अब कुछ कहने को बचा नहीं :-)

mahendra srivastava said...

क्या बात. बहुत सुंदर रचना

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