Monday, April 11, 2011

जी चाहता है

तुम्हारी बाहों में सर छुपाने को जी चाहता है !
तेरे पास आने को जी चाहता है !

लबो पे तबस्सुम निगाहों में चाहत
तेरी सूरत को दिल में बसाने को जी चाहता है !

दुरी सितम है और तू है सितमगर
ये दुरी मिटने को जी चाहता है !

मुहब्बत में तेरे अजब मेरी हालत
के आंसू बहाने को जी चाहता है !

25 comments:

अभिषेक said...

acchi hai ji..

sushma 'आहुति' said...

bhut khub...

Ghotoo said...

BAHUT ACHCHHI RACHNA

BADHAI
GHOTOO

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

प्रेम विरह की तड़पन भरी ..........व्याकुल मन की सुन्दर अभिव्यक्ति

Vijai Mathur said...

आप सब को भी राम नवमी बहुत-बहुत मुबारक हो.

Patali-The-Village said...

व्याकुल मन की सुन्दर अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

Surendrashukla Bhramar-सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर५ said...

तुम्हारी बाँहों में सर छुपाने को जी चाहता है !
तेरे पास आने को जी चाहता है !

लबों पे तबस्सुम निगाहों में चाहत
तेरी सूरत को दिल में बसाने को जी चाहता है !

दूरी सितम है और तू है सितमगर
ये दूरी मिटाने को जी चाहता है !

मुहब्बत में तेरे अजब मेरी हालत
कि आंसू बहाने को जी चाहता है !
मनप्रीत जी बहुत सुन्दर भाव अब रस धार बहने लगी आप के दिल में सुन्दर -जरा मेरे ऊपर लिखे शब्दों को देखिये और मन आये तो एडिट कर दो प्लीज़

सतीश सक्सेना said...

कमाल है ...बहुत खूब !! हार्दिक शुभकामनायें !

Dinesh said...

दुरी सितम है और तू है सितमगर
ये दुरी मिटने को जी चाहता है !

मुहब्बत में तेरे अजब मेरी हालत
के आंसू बहाने को जी चाहता है !

Really very nice.

RameshGhildiyal"Dhad" said...

kisi ki palak par thehra huaa aansoo............
moti bane ki ho khaksaar 'hasrat'

bahut sundar abhivyati darde dil ki......

bagdawat said...

man bhi kya kya chahta hai. bahut khoob. mere blog par bhi aayen.
http://bagdawat.blogspot.com

Ramkesh patel said...

बहुत बढिया लिखा है आपने |

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

बहुत ही प्‍यारी कविता है। बधाई।

---------
भगवान के अवतारों से बचिए!
क्‍या सचिन को भारत रत्‍न मिलना चाहिए?

G.N.SHAW said...

बहुत ही सुन्दर ....इंतज़ार करें , आंसू जरुर सूखेंगे !

Hema Nimbekar said...

भावपूर्ण अभिव्यक्ति

बवाल said...

दुरी सितम है और तू है सितमगर
ये दुरी मिटने को जी चाहता है !
बहुत उम्दा कहा मनप्रीत जी।

Dinesh pareek said...

व्यस्तता के कारण देर से आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ.

आप मेरे ब्लॉग पे पधारे इस के लिए बहुत बहुत धन्यवाद् और आशा करता हु आप मुझे इसी तरह प्रोत्सन करते रहेगे
दिनेश पारीक



दूरियां होने से यादे धुंधली हो जाती लेकिन कुछ यादें ऐसी होती है जो जिंदगी भर आप के साथ रहती है | यादे खट्टी मीठी सी उन्ही यादो के झरोखों से आप सब के लिए एक कविता लायी हूँ | जो कि मेरी नहीं अश्वनी दादा कि है उनकी ही इजाजत से आप सब के सामने रख रही हूँ |
काश कभी ऐसा हो जाए ,
दुनिया में बस हम और तुम हो ,
सारा जग खो जाए ,

OM KASHYAP said...

namaskar ji
blog par kafi dino se nahi aa paya mafi chahata hoon

OM KASHYAP said...

sunder shayri
very nice blog

Ashish (Ashu) said...

आपको पढने के बाद कमेट करने को जी चाहता हॆ
कि बस ऎसे ही लिखती रहे...

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

दोस्तों, क्या सबसे बकवास पोस्ट पर टिप्पणी करोंगे. मत करना,वरना......... भारत देश के किसी थाने में आपके खिलाफ फर्जी देशद्रोह या किसी अन्य धारा के तहत केस दर्ज हो जायेगा. क्या कहा आपको डर नहीं लगता? फिर दिखाओ सब अपनी-अपनी हिम्मत का नमूना और यह रहा उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से (http://sach-ka-saamana.blogspot.com/2011/04/blog-post_29.html )

Babli said...

बहुत दिनों के बाद आपके ब्लॉग पर आकर सुंदर कविता पढ़ने को मिला जिसके लिए धन्यवाद! बहुत बढ़िया लगा!

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

श्रीमान जी, मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

Surendrashukla" Bhramar" said...

तुम्हारी बाँहों में सर छुपाने को जी चाहता है !
तेरे पास आने को जी चाहता है !

लबों पे तबस्सुम निगाहों में चाहत
तेरी सूरत को दिल में बसाने को जी चाहता है !

दूरी सितम है और तू है सितमगर
ये दूरी मिटाने को जी चाहता है !

मुहब्बत में तेरे अजब मेरी हालत
कि आंसू बहाने को जी चाहता है !

मनप्रीत जी बहुत सुन्दर भाव अब रस धार बहने लगी आप के दिल में सुन्दर
-जरा मेरे ऊपर लिखे शब्दों को देखिये और मन आये तो एडिट कर दो प्लीज़

alka sarwat said...

भोली सी कविता अच्छी लगी.

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