Friday, April 8, 2011

एक अहसास .....

हमे कहते हो की पत्थर हैं
शिल्ला(पत्थर की मूरत) बहाया है खुदको !

दुनिया ने दिए इतने जखम हैं
आन्सुओ से भिगोया है खुदको !

वक़्त ने छीनी है खुशियाँ
मुसकुराहट से दूर किया है खुदको !

किस्मत ने रिश्ते जुदा किये हैं
मुकदर से जुदा किया है खुदको !

हर एहसास मारकर दिल में
मुश्किल से जीना सीखाया है खुदको !

प्यार नसीब में नहीं है
“दिल” ने समझाया है खुदको !

19 comments:

Hema Nimbekar said...

हर एहसास मारकर दिल में
मुश्किल से जीना सीखाया है खुदको !
प्यार नसीब में नहीं है
“दिल” ने समझाया है खुदको !

bahut badiya...

sushma 'आहुति' said...

bhut hi acchi rachna hai.. dil ko chu lene vali...

Vijai Mathur said...

हकीकत बयान की है.

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

सुन्दर अभिव्यक्ति !

अभिषेक said...

acchi rachna....

अनामिका की सदायें ...... said...

jitna aasan hai in ehsaso ko shabd dena utna aasan nahi in ehsaso ko jeena. bahut sashakt rachna.

प्रवीण शाह said...

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हर एहसास मारकर दिल में
मुश्किल से जीना सीखाया है खुदको !

प्यार नसीब में नहीं है
“दिल” ने समझाया है खुदको !


इतनी निराशा अच्छी नहीं, हम सबको हर वो चीज मिलती है जिसके हम लायक हैं।


...

Surendrashukla Bhramar-सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर५ said...

मनप्रीत जी उम्दा भाव ,सुन्दर रचना -बधाई हो - आइये आपका हार्दिक स्वागत है हमारे ब्लॉग पर - हम आप के सुझाव व् समर्थन की भी आस लगाये हैं
एक बात कहूँगा हिंदी थोड़ा और शुद्ध बनायें न तो और मजा आ जाये जैसे -
शिला बनाया है खुद को
जख्म , आँसुओं, मुस्कुराहट , मुकद्दर , सिखाया

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५
जालंधर पंजाब

krishan said...

Good efforts to express the feeling of true heart.

Dilbag Virk said...

gamgeen rachna
sahitya surbhi

Rahul Singh said...

क्‍या कहने इस अंदाजे-रूमानियत के.

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर अभिब्यक्ति| धन्यवाद|

वीना said...

प्यार में आंसू न बहें तो वो प्यार कैसा.....
सुंदर भाव....

Swarajya karun said...

दिल की गहराइयों से निकली आवाज . अच्छी कविता. आभार .

veerubhai said...

"pyar naseeb me nahin dil ne samjhaayaa hai khud ko "-
behatreen prayog .
veerubhai

वैज्ञानिक प्रार्थना said...

"हम में अधिकतर लोग तब प्रार्थना करते हैं, जबकि हम किसी भयानक मुसीबत या समस्या में फंस जाते हैं| या जब हम या हमारा कोई किसी भयंकर बीमारी या मुसीबत या दुर्घटना से जूझ रहा होता है तो हमारे अन्तर्मन से स्वत: ही प्रार्थना निकलती हैं| क्या इसका मतलब यह है कि हमें प्रार्थना करने के लिये किसी मुसीबत या अनहोनी के घटित होने का इन्तजार करना चाहिए!"

"स्वस्थ, समृद्ध, सफल, शान्त और आनन्दमय जीवन हर किसी का नैसर्गिक (प्राकृतिक) एवं जन्मजात अधिकार है| आप इससे क्यों वंचित हैं?"

एक सही ‘‘वैज्ञानिक प्रार्थना’’ का चयन और उसका अनुसरण आपके सम्पूर्ण जीवन को बदलने में सक्षम है| जरूरत है तो बस इतनी सी कि आप एक सही और पहला कदम, सही दिशा में बढाने का साहस करें|

"सफल और परिणाम दायी अर्थात ‘‘वैज्ञानिक प्रार्थना’’ का नाम ही- "कारगर प्रार्थना" है! जिसका किसी धर्म या सम्प्रदाय से कोई सम्बन्ध नहीं है| यह प्रार्थना तो जीवन की भलाई और जीवन के उत्थान के लिये है| किसी भी धर्म में इसकी मनाही नहीं है|"

जयकृष्ण राय तुषार said...

एक जिंदादिल शायरा /ब्लागर की खूबसूरत सी गज़ल बधाई |

Raam said...

दुनिया ने दिए इतने जखम हैं
आन्सुओ से भिगोया है खुदको !
very nice it is !!!
now to research ur Raam...just visit now...
www.susstheraam.blogspot.com,
www.theraam.weebly.com

Ioannis Passalis said...

Well, I put this through the translator , and, while I am sure some beauty was lost, enough was left to make it shine to my eyes. In Greekespecially, it was very strong. It speaks of a wild yearning for true liberty of the heart, if I may so humbly say. Memorable.

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