Monday, April 4, 2011

बरसात की रात

न भूल पाएंगे वो बरसात की रात
जो थी एक अनजान मुसाफिर से मुलाक़ात की रात

दर के तूफ़ान से लिपटे हम तुमसे ऐसे
आई भाहो में तेरे बिखर जाने की रात

मेरी जुल्फों से बरसता बरसात का पानी
हुई आग में जैसे सुलगते, बरसात की रात

थरथराते हुए लब जब लब से जा मिले
झूम के बादल घिरे , हुई मिलन की रात

दिल ने छुए प्यार के रंगीन अफसाने
थी वो रूह को रूह से महकने की रात

यह मौसम बरसात का तो रूठ गया था
पर संभाले हुए रखी , यह बरसात की रात !

14 comments:

Vijai Mathur said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति है.

Vijai Mathur said...

नवसंवत आप सब को मंगलमय हो तथा नवरात्रि पर्व उत्तम स्वस्थ्य्प्रदाता हो.

Alcina said...

Ye bilkul aisa lag raha tha jaise main koi sangeet sunn rahi thi..bohot hi achi abhivyakti hai :)

दिगम्बर नासवा said...

थरथराते हुए लब जब लब से जा मिले
झूम के बादल घिरे , हुई मिलन की रात ...

वाह ... क्या शेर है ... बरसात की रात भी क्या क्या गुल खिलाती है ... नवसंवत आप सब को मंगलमय हो ...

Pawan Rajput said...

wah kya baat hai.. but acha likha h apne aur khas baat ye ki apne dil se likha.

sushma 'आहुति' said...

wah... bhut pyari hai barsat ki raat....

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

वाह क्या रात है .............बरसात की रात

Kailash C Sharma said...

थरथराते हुए लब जब लब से जा मिले
झूम के बादल घिरे , हुई मिलन की रात

बहुत सुन्दर...बरसात की रात फिल्म के गाने की याद दिलादी

sm said...

beautiful rainy poem

monali said...

Immensely romantic.. touched me.. loved ur blog :)

Abnish Singh Chauhan said...

यह मौसम बरसात का तो रूठ गया था
पर संभाले हुए रखी , यह बरसात की रात !
बहुत खूब. मेरी बधाई स्वीकारें.

Arvind Mishra said...

बरसात की रात ऐसी हो तो भला वो कभी भूली भी जा सकती है ?

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह said...

Ek umda gazal ke liye meri hardik shubhkamnayen sweekariye
sader,
dr.bhoopendra
jeevansandarbh.blogspot.com

AJMANI61181 said...

aap bura naa mane aapko ek baat keh raha hoon aapki ghazal kayi gaane aur sms se milte julte hai

jaise ki
jindagi bhar nahi bhulegi vo barsaat ki raat
ek anjaan musaafir se mulaqaat ki raat

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