Monday, April 11, 2011

जी चाहता है

तुम्हारी बाहों में सर छुपाने को जी चाहता है !
तेरे पास आने को जी चाहता है !

लबो पे तबस्सुम निगाहों में चाहत
तेरी सूरत को दिल में बसाने को जी चाहता है !

दुरी सितम है और तू है सितमगर
ये दुरी मिटने को जी चाहता है !

मुहब्बत में तेरे अजब मेरी हालत
के आंसू बहाने को जी चाहता है !

Friday, April 8, 2011

एक अहसास .....

हमे कहते हो की पत्थर हैं
शिल्ला(पत्थर की मूरत) बहाया है खुदको !

दुनिया ने दिए इतने जखम हैं
आन्सुओ से भिगोया है खुदको !

वक़्त ने छीनी है खुशियाँ
मुसकुराहट से दूर किया है खुदको !

किस्मत ने रिश्ते जुदा किये हैं
मुकदर से जुदा किया है खुदको !

हर एहसास मारकर दिल में
मुश्किल से जीना सीखाया है खुदको !

प्यार नसीब में नहीं है
“दिल” ने समझाया है खुदको !

Wednesday, April 6, 2011

दोस्ती

झूठी मुस्कराहट से ज़िन्दगी नहीं होती
उम्र बिताना भी
तो ज़िन्दगी नहीं होती

मिटाना खुदको पड़ता है दोस्ती में
सिर्फ दोस्त कह देना तो दोस्ती नहीं होती

गम में हो साथ उसको कहते दोस्ती
मैं हूँ कह देने से दोस्ती नहीं होती

हर हाल में निभाना है सची दोस्ती
कह कर मूह कर जाना दोस्ती नहीं होती

लोग बहुत मिल जायेंगे तुम्हे रह में
पर साब की मणि जैसी दोस्ती नहीं होती

रहे दोस्त हमारे खुश दुआ सदा मेरी
दुआओं की मणि से कभी कमी नहीं होती !

Monday, April 4, 2011

बरसात की रात

न भूल पाएंगे वो बरसात की रात
जो थी एक अनजान मुसाफिर से मुलाक़ात की रात

दर के तूफ़ान से लिपटे हम तुमसे ऐसे
आई भाहो में तेरे बिखर जाने की रात

मेरी जुल्फों से बरसता बरसात का पानी
हुई आग में जैसे सुलगते, बरसात की रात

थरथराते हुए लब जब लब से जा मिले
झूम के बादल घिरे , हुई मिलन की रात

दिल ने छुए प्यार के रंगीन अफसाने
थी वो रूह को रूह से महकने की रात

यह मौसम बरसात का तो रूठ गया था
पर संभाले हुए रखी , यह बरसात की रात !