Tuesday, March 15, 2011

Tere baahon ki tapish

Tere baahon ki tapish main pighalne lagi hun
Teri sanson ki mehek main sulagne lagi hun

Raat ki tanhaai main lipti khumaar ki baatein
Tere baaton ki kashish main machalne lagi hun

Sulagti raat ki bikharti chandni main hum-tum
Behekne lage jazbaat aur bhadakne lagi hun

Ruan-ruan tere pyaar main sarabor hone laga
Tere baahon ke gheron main dhadakne lagi hun

Tere sath bitaai lamhon ki kasak seene main
Zindagi jeene ki "aarzoo" main tadapne lagi hun

8 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत गज़ल ....आप देवनागरी में टाइप करें ...गज़ल का मज़ा दुगना हो जायेगा ...




कृपया टिप्पणी से वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

Kailash C Sharma said...

Raat ki tanhaai main lipti khumaar ki baatein
Tere baaton ki kashish main machalne lagi hun

बहुत खूब! बहुत सुन्दर गज़ल..हरेक शेर लाज़वाब
(it will be convenient if u remove world verification)

Kunwar Kusumesh said...

बहुत सुन्दर गज़ल.

आपको हिंदी में टाइप करने में दिक्कत हो तो gmail पर compose में जाकर 'अ' पर क्लिक करे जब 'अ' hihglight करने लगे तो आप जैसे अंग्रेजी में टाइप करती हैं वैसे ही अंग्रेजी में टाइप करे वो हिंदी में convert करता चलेगा.फिर मैटर को कॉपी पेस्ट करके पोस्ट पर लगा लें.ब्लॉग बढ़िया और हिंदी में हो जायेगा.

Hema Nimbekar said...

तेरे बाहों की तपिश में पिघलने लगी हूँ
तेरी सांसों की महक में सुलगने लगी हूँ

बहुत बढ़िया...पहली पंक्ति ने ही मेरा मन ले लिया...
इसी तरह लिखती रहिये ....आभार

Manpreet Kaur said...

thax 2 all f u

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

आद. मनप्रीत जी,
ग़ज़ल का हर शेर दिल में उतर गया !
खूबसूरत ख्यालों का खूबसूरत गुलदस्ता !
शुक्रिया !

cmpershad said...

पहली बार आने का अवसर मिला। आभार॥ बहुत सुंदरता और सक्षमता से ब्लाग को सजाया है। बधाई:)

एस.एम.मासूम said...

अंदाज़ ए बयान बहुत पसंद आया. लगता है बार बार आना होगा.

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