Wednesday, March 23, 2011

सदा पास ही पाओ गे मुझे:D

थक जाओ अगर पथरीले रास्तों पे चलते हुए
कभी सोच लेना की वहां तनहा हो तुम सनम
मूँद कर पलकों को अपनी जो तुम देखोगे
अपने साथ ही सदा मुझ को पाओगे तुम

इश्क नाम तो नहीं है मिलन का ,दीदार का
दिल से दिल का मिल जाना है नाम - -मोहब्बत
जो याद जाए मेरी , समझना की दूर हूँ
अपने सीने मैं धड़कता, मुझ को पाओगे तुम सनम

वक़्त की गर्मी जो झुलसाने लगे वुजूद
मेरी चाहत की नमी को महसूस करना
जो सर्द हवाएँ ज़माने की आने लगें पास
मेरी वफाओं की गर्मी को महसूस करना
मैं तुमसे जुदा तो नहीं हूँ मेरे हमदम
अपने साथ ही सदा मुझ को पाओगे तुम !!

7 comments:

abhishek said...

bahut accha hai..

good day..

Hema Nimbekar said...

apka harek post bahut badiya hai..ek se badkar ek hai....aap bahut achchi poetess hai..keep writing

Dr. Braj Kishor said...

ROCHAK AUR MAJEDAR

Rakesh Kumar said...

क्या सुन्दर लिखतीं हैं आप.प्रेम के भावों का अदभुत संयोजन

sumeet "satya" said...

Prem ki sundar abhivyakti

नवीन जोशी said...

"वक़्त की गर्मी जो झुलसाने लगे वुजूद
मेरी चाहत की नमी को महसूस करना
जो सर्द हवाएँ ज़माने की आने लगें पास
मेरी वफाओं की गर्मी को महसूस करना
मैं तुमसे जुदा तो नहीं हूँ मेरे हमदम
अपने साथ ही सदा मुझ को पाओगे तुम !!"

bahut hee sundar prastuti, gajab ka samarpan w prem ka bhaav.

bilaspur property market said...

एक एक शब्द मोती ...
बहुत बढ़िया कलम चली है

manish jaiswal

Chhattisgarh

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