Sunday, March 20, 2011

शरारत - :D

चुपके से तेरी नज़र सताती रही
और मैं आँचल पीछे शर्माती रही

कभी उधर बैठूं , कभी कहीं और
फिर भी तेरी नज़र पास बुलाती रही

रात हुई तोह हम करवटें बदलते रहे
शोख धरकन जाने क्या गुनगुनाती रही

कांपते होंटों को छुआ तोह तन में लगी आग
तू शरारत करता रहा , मैं प्यास बहुजाती रही

बहिर तूफानी मौसम पे खिड़कियाँ हो रहीं थी बांध
मैं अपने दिल में बससे तूफ़ान को बहलाती रही

साँसों की गर्मी में कट गयी कुछ ऐसे ही रात
सुबह हुई तो तू सोता रहा , मैं मुस्कुराती रही !

13 comments:

GirishMukul said...

धरकन को सुधार लीजिये
शेष वाक़ई बहुत उम्दा है

दर्शन कौर धनोए said...

बहुत सुंदर कविता लिखती हो बेटे पर हिंदी पर थोडा ध्यान दो --सत श्री अकाल---

दर्शन कौर धनोए said...

दोनों में से मन प्रीत कोन है ?

Kailash C Sharma said...

बहुत सुन्दर भाव और उनकी अभिव्यक्ति...थोडा शब्दों पर ध्यान दीजिए..करवाते की जगह करवटें और तोह की जगह तो ज्यादा उपयुक्त होगा..आशा है सुझाव अन्यथा नहीं लेंगी..वैसे आप अच्छा लिखती हैं..शुभकामनायें!

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

बड़े मन मोहक भाव हैं रचना के !

Hema Nimbekar said...

अति सुंदर भावपूर्ण रचना.

VIJUY RONJAN said...

main shabdon pe nahi gaya...bhav pe gaya.ati sundar abhivyakti...

कांपते होंटों को छुआ तोह तन में लगी आग
तू शरारत करता रहा , मैं प्यास बहुजाती रही

Californea mein rahkar Hindi mein likhna hi ek bahut bari baat hai....bahut bahut badhayee...

saurabh sinha said...

sunder hai....good day:)

har shabd me ek akshar honge tere nam ki
har ghazal me ek ehsaas hogi tere imaan ki
ham to safar kar lenge tanha tanha bhi
zamane ko fikar hogi mere raushan kaarwaan ki

tu jo na bhi aayi to aisa mera gumaan tha
tu aa jati to mera ishq kis kaam ka tha
tere diye kishti pe swar samunder fand jaunga
nishaniyan lahron par hongi hamare imtehaan ki....

abhishek said...

accha hai ...shayari aapki.....
good evening:)

AJMANI61181 said...

चुपके से तेरी नज़र सताती रही
और मैं आँचल पीछे शर्माती रही


bahut accha bhaav hai
sunder rachna manpreet kaur ji

AJMANI61181 said...

manpreet ji kripya bura naa maane
तोह
रात हुई तोह हम करवटें बदलते रहे

धरकन
शोख धरकन जाने क्या गुनगुनाती रही

तोह
कांपते होंटों को छुआ तोह तन में लगी आग

बहुजाती
तू शरारत करता रहा , मैं प्यास बहुजाती रही

बहिर बांध बसस

जाट देवता (संदीप पवांर) said...

कहां से इतना सोच लेते हो कमाल है, मजेदार यात्रा देखनी है, तो आ जाओ ।

Suman said...

achi hai rachna .........

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