Monday, March 21, 2011

ज़िक्र तुम्हारा - सिर्फ तुम्हारा सनम

चलती है साँसे मेरी तब जीकर तुम्हारा होता है
इन् मुस्कुराते होंठो पे बस ज़िक्र तुम्हारा होता है !

मेरे दिल पर है हर पल आब पहरा तुम्हारा
महफ़िल साझी होती है और ज़िक्र तुम्हारा होता है !

हवैएँ भी याद दिलाते है पल पल तुम्हारा और
जब पत्ते सर सरते है तब ज़िक्र तुम्हारा होता है !

कली रात मैं जब देखती हूँ मैं चाँद की और
जब चांदनी मुस्कुराती है तो ज़िक्र तुम्हारा होता है !

छाये हो इस क़दर दिल - -दिमाग पे मेरे हमदम ,
रौशन है महफ़िल और ज़िक्र तुम्हारा होता है

11 comments:

Sawai Singh Rajpurohit said...

बहुत ही अच्छी रचना..

बहुत सुंदर लिखा आपने.....

सहज साहित्य said...

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना है , मनप्रीत जी

Akash Singh said...

छाये हो इस क़दर दिल -ओ -दिमाग पे मेरे हमदम ,
रौशन है महफ़िल और ज़िक्र तुम्हारा होता है

क्या बात है मनप्रीत जी बहुत खूब.. लिखते रहिये मैं आपका ब्लोग्स जरुर पढूंगा|

यहाँ भी आयें,
यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो फालोवर अवश्य बने .साथ ही अपने सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ .

Hema Nimbekar said...

अति सुंदर भावपूर्ण रचना मनप्रीत जी...

Babli said...

मेरे दिल पर है हर पल आब पहरा तुम्हारा
महफ़िल साझी होती है और ज़िक्र तुम्हारा होता है !
वाह! बेहद सुन्दर पंक्तियाँ! इस लाजवाब और भावपूर्ण रचना के लिए बधाई!

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर" Dr.Rajendra Tela,Nirantar" said...

"ज़िक्र जिसका भी करो होठों से
दिल,जहन में उसे ही रखना
नाम निरंतर उसका ही लेना
मिले तुम्हें बहुत ज़ल्दी से
दुआ रब से यही करना "
good one---keep it up
log on to my blogs
www.nirantarajmer.com
For english
www.nirantarajmer.blogspot.com

sushma 'आहुति' said...

हवैएँ भी याद दिलाते है पल पल तुम्हारा और
जब पत्ते सर सरते है तब ज़िक्र तुम्हारा होता है !..bhut hi khubsurat kavita aur bhaav hai...

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

मनप्रीत कौर जी, मैं आपके सुनहरेपल का अनुसरण करना चाहता हूँ.मगर आपने उसमें Followers का कालम ही बनाया है. कृपया करके आप शुरुयात की रचनाओं "तारों की चमक मैं, तेरे बाहों की तपिश, मेरा महबूब, सपना" को हिंदी में अनुवाद करके पोस्ट करों,बाद की रचनाएँ "ज़िक्र तुम्हारा-सिर्फ तुम्हारा सनम, शरारत- :D, संगदिल सनम ने मुझे तड़पाया, प्यार के नाम" बहुत अच्छी है. मगर कहीं -कहीं हिंदी के उच्चारण की गलती होने के कारण चाँद पर दाग लग रहा है. अगर किसी कारणवश आप हिंदी में शुध्द उच्चारण लिखने में असमर्थ हो तो आप रचना पोस्ट करने से पहले मुझे ईमेल कर दिया करें . उसके बाद मैं उसका शुध्दिकरण करके ईमेल कर दिया करूँगा . इसमें आपकी पोस्ट एक -दो दिन देर से प्रकाशित होगी . मगर आपकी हर रचना चाँद की तरह चमकेंगी . आपके जवाब का मन से इन्तजार रहेगा ..........

हिंदी में काम करके,राष्ट्र का सम्मान करें.
श्रीमान जी, आपने अगर मुझे कभी ईमेल भेजी हो और उसका जवाब नहीं मिला हो तो नोट करें आप जब मुझसे किसी प्रकार का कोई जवाब चाहते हैं तो अपनी ईमेल में अपने विचार हिंदी में लिखकर ही भेजें या आप मुझसे हिंदी में फ़ोन पर बात करलें अथवा मैं अंग्रेजी में भेजे गए विचारों और बातों का जवाब देने में असमर्थ हूँ
आप सभी पाठकों और दोस्तों से हमारी विनम्र अनुरोध के साथ ही इच्छा हैं कि-अगर आपको समय मिले तो कृपया करके मेरे (http://sirfiraa.blogspot.com , http://rksirfiraa.blogspot.com , http://shakuntalapress.blogspot.com , http://mubarakbad.blogspot.com , http://aapkomubarakho.blogspot.com , http://aap-ki-shayari.blogspot.com , http://sachchadost.blogspot.com, http://sach-ka-saamana.blogspot.com , http://corruption-fighters.blogspot.com ) ब्लोगों का भी अवलोकन करें और अपने बहूमूल्य सुझाव व शिकायतें अवश्य भेजकर मेरा मार्गदर्शन करें. आप हमारी या हमारे ब्लोगों की आलोचनात्मक टिप्पणी करके हमारा मार्गदर्शन करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे.हम आपकी आलोचनात्मक टिप्पणी का दिल की गहराईयों से स्वागत करने के साथ ही प्रकाशित करने का आपसे वादा करते हैं # निष्पक्ष, निडर, अपराध विरोधी व आजाद विचारधारा वाला प्रकाशक, मुद्रक, संपादक, स्वतंत्र पत्रकार, कवि व लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" फ़ोन:09868262751, 09910350461 email: sirfiraa@gmail.com

शिक्षामित्र said...

प्रेम की सहज अभिव्यक्ति।

AJMANI61181 said...

kuch sabdo me mistake hai aap inhe sudhaar lijiye main dhyaan dilaa raha hoon kripya bura naa maaniye

जीकर
चलती है साँसे मेरी तब जीकर तुम्हारा होता है

हवैएँ
हवैएँ भी याद दिलाते है पल पल तुम्हारा और

सर सरते
sarsaaraate


कली
कली रात मैं जब देखती हूँ मैं चाँद की और

charandeep ajmani

देवेन्द्र पाण्डेय said...

चाँद की और
..चाँद की ओर। अजमानी जी के कमेंट पर भी गौर करें।
..सुंदर गज़ल में टंकण की त्रुटियाँ खलती हैं।

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