Thursday, March 17, 2011

प्यार के नाम

तुझे कुछ यूँ अपना बना लूं मैं
तेरे नाम से खुद को सजा लूं मैं

तेरी मुस्कराहट से हरमन , सीने से लगी रहूँ
ज़िन्दगी तेरी इन् बाहों में बिता लूं मैं

तुझे जी भर के देखूं , और देखती ही रहूँ
काश अपने चाँद को यूँ पास बुला लूं मैं

तेरे हर गम को गले लगाऊ , हर दुःख सह लूं
तुझे हर बुरी नज़र से यूँ बचा लूं मैं

तू हमेशा मेरा नाम कह कर मुस्कुराता रहे
तेरी मुस्कराहट क इरादों से शर्मा लूं मैं

दिन हँसते हुए बीताऊ तेरा ख्याल रखते रखते
और फिर रात को तेरी मोहब्बत से महका लूं मैं

तेरी छोटी सी गलती पे रूठ जाऊ क तू मुझे मनाये
नखरे दिखाऊ , पर चुपके से मुस्कुरा लूं मैं

हँसते खेलते गुज़र जाए कुछ ऐसे ही हमारा जीवन
काश इस हसीं सपने को हकीकत बना लूं मैं

सोचती हूँ क कर ही दूं इज़हार-इ-मोहब्बत , पर नहीं
क्यों न अभी और थर्पाऊ , कुछ देर और सता लूं मैं !

12 comments:

Kunwar Kusumesh said...

तुझे जी भर के देखूं , और देखती ही रहूँ
काश अपने चाँद को यूँ पास बुला लूं मैं

बढ़िया है.

शिक्षामित्र said...

प्रेम की सहज अभिव्यक्ति। ऐसे पल दाम्पत्य को सुमधुर बनाते हैं।

Hema Nimbekar said...

bahut khub...bahut hi sahezta se bhav ki sunder prastuti..

kirpya mujhe bhi padhe..

stories/kahaiyain
http://nimhem.blogspot.com/p/part-1.html

kavita/Poems>>
http://nimhem.blogspot.com/p/poems-links-list.html

shero-shayeri
http://nimhem.blogspot.com/p/shero-shayeri.html

Satish Chandra Satyarthi said...

आपके ब्लॉग पर पहली बार आया.. अच्छा लगा..
ऐसे ही लिखती रहें.. शुभकामनाएं..

मुकेश कुमार तिवारी said...

मनप्रीत जी,
प्रेम और उल्लास भरे फागुन में आपकी गज़ल पढ़ना सुखद लगा।
होली की आप सभी को रंगारंग मुबारकबाद........
सादर,
मुकेश कुमार तिवारी

सतीश सक्सेना said...

बढ़िया प्रयास हैं! शुभकामनायें होली की

तरूण जोशी " नारद" said...

badhiya likhti hai ap.

तरूण जोशी " नारद" said...

जो मैंने चाहा नही वो अंजाम हो गया
मेरी तमन्नाओं का ये क्या मुकां हो गया,
मेरी जान औ रूह सिमटी थी एक आहट में
और वो आहट बसी थी केवल तेरी ही चाहत में,

चाहके भी तुमको हम पा ना सके
दाग लग गया दामन बचा ना सके,
छींटे जो लग उडे रंग-ए-मोहब्बत के
चाह के भी खुद को हम छिपा ना सके,

जब भीग ही गये तो मजा डूब के लिया
वो मजा भी पूरा हम पा ना सके,

डूबते को तिनके ने सहारा दे दिया
इसी के साथ मुझे उसी ने बेसहारा किया,
ले गया मुझको दूर वो किनारे से
ना डूब में सका ना सुखने दिया,

तुम जो सोचो कि नारद तिनके का कद्रदान हैं
ये ना सोचो कि तिनके में मुझे ख्वाबगाह मिला,
सच है कि तिनका मेरा कब्रगाह है बना

ये कहानी बयां कर रहा हुँ आज मैं बेटू
ये समझना ना कि बेवफ़ा था स्वीटू

मैं तुमसे दूर होके अकेला हूं अधूरा हूँ,
तुमसे ही मैं पूरा हूँ
बस जिन्दगी में तेरी ही ख्वाईश रखी
तेरे सिवा अब ना कोई ख्वाईश रही,

तेरी नफरत के आगे मेरी आस टूट गई,
तेरी नफरत के आगे मेरी आस टूट गई,
यादों में जी रहा हूँ , मेरी सांस छूट गई!


"नारद"

अहसास की परतें - समीक्षा said...

सुन्दर रचना



कृपया जापान के प्रकृतिक आपदा का उपहास उडाने वालों के विरुद्ध मेरा साथ दे इस पोस्ट पर http://ahsaskiparten-sameexa.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

Rakesh Kumar said...

अति सुंदर भावपूर्ण रचना.
होली पर आपको और सभी ब्लोगर जन को हार्दिक शुभ कामनाएँ .

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर" Dr.Rajendra Tela,Nirantar" said...

Very good attempt

AJMANI61181 said...

हरमन

तेरी मुस्कराहट से हरमन , सीने से लगी रहूँ

बीताऊ

जाऊ क तू मुझे मनाये

इज़हार-इ-मोहब्बत ,

थर्पाऊ ,

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