Tuesday, May 31, 2011

इंतज़ार

इंतज़ार  में  जिनके  हम  बैठे  थे ,
उसकी  आहात  भी  सुनाई न  दी .
 

खयालो  में  वो  जो  एक  चेहरा  था ,
उसकी  झलक  भी  दिखाई  न  दी .
 

थी  जिसकी में आशीक वो  तो  बेवफा  निकला ,
बिछड़े  हम  ऐसे  की ,
गिरते  हुए  आँसों  की  आवाज़  भी  सुनाई न दी  ......

Wednesday, May 4, 2011

क्यों दूर हो कर भी कोई

क्यों दूर हो कर भी
कोई दिल के पास रहता है .

दिल के पास हो कर भी
क्यों उस का इंतज़ार रहता है .

यह कैसा दर्द है
जो मीठा सा लगता है .

महफ़िल में हूँ मगर
मुझे तनहा सा लगता है .

क्यों हम हर पल
उनके ख्यालों में खोये रहते हैं .

उनके ही ख्यालों से
अपनी दुनिया सजाये रहते हैं .

क्यों लगता है
हम उनके बिना अधूरे हैं .

मिल जाए अगर वोह
तो सारे सपने पूरे हैं ..

Monday, April 11, 2011

जी चाहता है

तुम्हारी बाहों में सर छुपाने को जी चाहता है !
तेरे पास आने को जी चाहता है !

लबो पे तबस्सुम निगाहों में चाहत
तेरी सूरत को दिल में बसाने को जी चाहता है !

दुरी सितम है और तू है सितमगर
ये दुरी मिटने को जी चाहता है !

मुहब्बत में तेरे अजब मेरी हालत
के आंसू बहाने को जी चाहता है !

Friday, April 8, 2011

एक अहसास .....

हमे कहते हो की पत्थर हैं
शिल्ला(पत्थर की मूरत) बहाया है खुदको !

दुनिया ने दिए इतने जखम हैं
आन्सुओ से भिगोया है खुदको !

वक़्त ने छीनी है खुशियाँ
मुसकुराहट से दूर किया है खुदको !

किस्मत ने रिश्ते जुदा किये हैं
मुकदर से जुदा किया है खुदको !

हर एहसास मारकर दिल में
मुश्किल से जीना सीखाया है खुदको !

प्यार नसीब में नहीं है
“दिल” ने समझाया है खुदको !

Wednesday, April 6, 2011

दोस्ती

झूठी मुस्कराहट से ज़िन्दगी नहीं होती
उम्र बिताना भी
तो ज़िन्दगी नहीं होती

मिटाना खुदको पड़ता है दोस्ती में
सिर्फ दोस्त कह देना तो दोस्ती नहीं होती

गम में हो साथ उसको कहते दोस्ती
मैं हूँ कह देने से दोस्ती नहीं होती

हर हाल में निभाना है सची दोस्ती
कह कर मूह कर जाना दोस्ती नहीं होती

लोग बहुत मिल जायेंगे तुम्हे रह में
पर साब की मणि जैसी दोस्ती नहीं होती

रहे दोस्त हमारे खुश दुआ सदा मेरी
दुआओं की मणि से कभी कमी नहीं होती !

Monday, April 4, 2011

बरसात की रात

न भूल पाएंगे वो बरसात की रात
जो थी एक अनजान मुसाफिर से मुलाक़ात की रात

दर के तूफ़ान से लिपटे हम तुमसे ऐसे
आई भाहो में तेरे बिखर जाने की रात

मेरी जुल्फों से बरसता बरसात का पानी
हुई आग में जैसे सुलगते, बरसात की रात

थरथराते हुए लब जब लब से जा मिले
झूम के बादल घिरे , हुई मिलन की रात

दिल ने छुए प्यार के रंगीन अफसाने
थी वो रूह को रूह से महकने की रात

यह मौसम बरसात का तो रूठ गया था
पर संभाले हुए रखी , यह बरसात की रात !

Thursday, March 31, 2011

याद तेरी आने लगी

जब जब दिल को बीते दिनों की याद लगी आने
तब तब तनहा रतियाँ मेरी लगी म्हेकने !

धड़कने धरकती है तेज़ जब देखू तुझे
ख्वाबों में तेरी सूरत जो लगी सामने

छुआ तेरी उँगलियों ने गालों को ऐसे की
नज़रें हमारी झुकी और लगी शरमाने

तड़पता है दिल हर पल साथ के लिए तेरे
आब तो यह जुदाई मुझको है लगी तडपाने

तेरे प्यार का नशा यूँ चरा है मुझे
यादें तेरी आज मुझको है लगी बहकाने !